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चोट लगने और टिटनेस के इंजेकà¥à¤¶à¤¨ का कà¥à¤¯à¤¾ कनेकà¥à¤¶à¤¨ है, कà¥à¤¯à¤¾ होगा अगर इंजेकà¥à¤¶à¤¨ न लगवाà¤à¤‚ तो?
Tetanus Injection Facts: चोट लगने और टिटनेस का कà¥à¤¯à¤¾ कनेकà¥à¤¶à¤¨ है, टिटनेस का बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ शरीर में कैसे पहà¥à¤‚चता है,कौन से लकà¥à¤·à¤£ इस बीमारी का इशारा करते हैं और कà¥à¤¯à¤¾ होगा अगर इसका इंजेकà¥à¤¶à¤¨ न लगवाया जाठतो? जानिठइन सवालों के जवाब
टिटनेस को लॉकजॉ के नाम से à¤à¥€ जाना जाता है.
चोट लगते ही घर के बà¥à¤œà¥à¤°à¥à¤— लोग à¤à¤• ही सलाह देते हैं, सबसे पहले टिटनेस का इंजेकà¥à¤¶à¤¨ (Tetanus Injection) लगवाओ. पर चोट लगने और टिटनेस के इंजेकà¥à¤¶à¤¨ का कà¥à¤¯à¤¾ कनेकà¥à¤¶à¤¨ है और इसे न लगवाà¤à¤‚ तो कà¥à¤¯à¤¾ होगा? इसे समà¤à¤¨à¤¾ बहà¥à¤¤ जरूरी है. दरअसल टिटनेस à¤à¤• बीमारी है. इसकी वजह कà¥à¤²à¥‰à¤¸à¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¡à¤¿à¤¯à¤® टटेनाइ (Clostridium tetani) नाम का बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ है. इसी बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ का जब संकà¥à¤°à¤®à¤£ होता है तो यह बीमारी होती है. चोट लगने पर, छिलने पर, लोहे की चीज से सà¥à¤•िन पर कोई कट लगने पर इसी बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ के संकà¥à¤°à¤®à¤£ (Bacterial Infection) का खतरा बढ़ता है, इसलिठटिटनेस के इंजेकà¥à¤¶à¤¨ को लगाने की सलाह दी जाती है.
चोट लगने और टिटनेस का कà¥à¤¯à¤¾ कनेकà¥à¤¶à¤¨ है, टिटनेस का बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ शरीर में कैसे पहà¥à¤‚चता है,कौन से लकà¥à¤·à¤£ इस बीमारी का इशारा करते हैं और कà¥à¤¯à¤¾ होगा अगर इसका इंजेकà¥à¤¶à¤¨ न लगवाया जाठतो? जानिठइन सवालों के जवाब
चोट लगने और टिटनेस का कनेकà¥à¤¶à¤¨ समà¤à¥‡à¤‚?
टिटनेस का बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ आमतौर पर मिटà¥à¤Ÿà¥€ में पाया जाता है. इसलिठजिन à¤à¥€ चीजों पर मिटà¥à¤Ÿà¥€ मौजूद होती है उससे किसी à¤à¥€ तरह से अगर इंसान घायल होता है तो इसके संकà¥à¤°à¤®à¤£ का खतरा बढ़ता है. अगर आपको चोट दूसरी वजह से लगी है लेकिन उस पर मिटà¥à¤Ÿà¥€ या धूल है तो à¤à¥€ इस टिटनेस के बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ के संकà¥à¤°à¤®à¤£ का खतरा बढ़ता है. इसलिठघायल होने की वजह लोहे की चीज हो या सड़क दà¥à¤°à¥à¤˜à¤Ÿà¤¨à¤¾. दोनों ही मामलों में टिटनेस का इंजेकà¥à¤¶à¤¨ लगवाने की सलाह दी जाती है. कई बार लमà¥à¤¬à¥‡ समय के लिठघाव को खà¥à¤²à¤¾ छोड़ने पर मिटà¥à¤Ÿà¥€ और धूल पहà¥à¤‚चती है, à¤à¤¸à¥‡ मामलों में à¤à¥€ यह इंजेकà¥à¤¶à¤¨ लगवाने की सलाह दी जा सकती है.
कौन से लकà¥à¤·à¤£ बताते हैं कि टिटनेस का संकà¥à¤°à¤®à¤£ हà¥à¤† है?
टिटनेस को लॉकजॉ (Lockjaw) के नाम से à¤à¥€ जाना जाता है. टिटनेस का संकà¥à¤°à¤®à¤£ à¤à¤• से दूसरे इंसान में नहीं फैलता. हेलà¥à¤¥à¤²à¤¾à¤‡à¤¨ की रिपोरà¥à¤Ÿ कहती है, बà¥à¤–ार आने, हाई बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° के बढ़ने, पसीना छूटने या दिल की धड़कन का तेज होना टिटनेस का लकà¥à¤·à¤£ है. संकà¥à¤°à¤®à¤£ के बाद इंजेकà¥à¤¶à¤¨ न लगवाने पर करीब 14 दिन के अंदर इसके लकà¥à¤·à¤£ नजर आने लगते हैं. इसलिठजलà¥à¤¦ से जलà¥à¤¦ इंजेकà¥à¤¶à¤¨ लगवाना ही बेहतर विकलà¥à¤ª है.
कà¥à¤¯à¤¾ होगा अगर इंजेकà¥à¤¶à¤¨ नहीं लगवाया गया तो
अगर इंजेकà¥à¤¶à¤¨ नहीं लगवाते हैं तो बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ का संकà¥à¤°à¤®à¤£ गंà¤à¥€à¤° रूप ले सकता है. जैसे- सांस लेने में दिकà¥à¤•त हो सकती है, बà¥à¤°à¥‡à¤¨ में ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ की कमी होने से यह डैमेज हो सकता है. इसके अलावा निमोनिया हो सकता है, धड़कने असामानà¥à¤¯ हो सकती हैं और हडà¥à¤¡à¥€ के डैमेज होने का खतरा à¤à¥€ बढ़ता है.
इसलिठà¤à¤¸à¥‡ मामलों में टिटनेस का इंजेकà¥à¤¶à¤¨ लगना जरूरी है. यही वजह है कि टिटनेस का इंजेकà¥à¤¶à¤¨ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के इमà¥à¤¯à¥à¤¨à¤¾à¤‡à¤œà¥‡à¤¶à¤¨ पà¥à¤°à¥‹à¤—à¥à¤°à¤¾à¤® में शामिल किया जाता है. इसलिठइसे कà¤à¥€ à¤à¥€ नजरंदाज न करें. किसी तरह की कंफà¥à¤¯à¥‚जन की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥€ सलाह जरूर लें.
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